नैनीताल की मशहूर हस्ती जाने-माने रंगकर्मी विशंभरनाथ साह ‘सखा’ का निधन, सरोवर नगरी में शोक की लहर

अफज़ल हुसैन ‘फौजी’, नैनीताल। सरोवर नगरी के जाने-माने रंगकर्मी, शास्त्रीय संगीतज्ञ, पेंटर, लेखक, बॉक्सर, शिक्षक, नेता, शिकारी आदि विभिन्न प्रतिभाओं के धनी विशंभर नाथ साह सखा का बृहस्पतिवार को हल्द्वानी के निजी अस्पताल में निधन हो गया। निधन की खबर सुनते ही नगर वासियों व कला जगत से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ पड़ी। विधायक सरिता आर्या ने उनके घर जाकर परिजनों को सांत्वना दी। 8 अप्रैल शुक्रवार को प्रातः 10 बजे उनके निवास स्थान कैलाखान से उनकी अंतिम यात्रा पॉइंट शमशान घाट को निकलेगी। नैनीताल में सखा नाम से प्रख्यात विशंभर नाथ साह का जन्म 13 जुलाई 1933 को अल्मोड़ा खजांची मोहल्ला निवासी भवानी दास साह के घर हुआ था। चूंकि माताजी का स्वास्थ्य खराब हो जाने के कारण उनका लालन-पालन नैनीताल में उनके नाना नानी के घर में ही हुआ था जो कि अब उनका वर्तमान निवास भी है। बता दें कि उनके नाना नानी के कोई पुत्र ना होने के कारण उनके वारिस विशंभर नाथ शाखा बने, जोकि अंतिम समय तक उसी निवास स्थान कैला खान में ही बने रहे। विशंभर नाथ साह बाल्यकाल से ही रामलीला आदि में प्रतिभाग करने लगे थे। कला के प्रति उनकी रुचि बढ़ने लगी साथ ही नैनीताल से ही गवर्मेंट स्कूल से इंटर व वर्तमान के डीएसबी कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
कला के प्रति अपार प्रेम होने के कारण उन्होंने कलकत्ता शांति निकेतन में दाखिला भी लिया व ढाई वर्ष वहां रहने के बाद स्वास्थ्य की असहजता के कारण उन्हें पुनः नैनीताल आना पड़ा। नैनीताल में कला के प्रति उनके हृदय में अनेकों भाव उत्पन्न होने लगे, तभी 1951/ 52 के तहत नैनीताल में भव्य शरदोत्सव का आयोजन किया जाने लगा। उस दौरान रामपुर घराने के शास्त्रीय संगीतज्ञ जिन्हें नवरत्न उपाधि मिली थी उन्हें शरदोत्सव में आमंत्रित किया गया। सखा जी की कला प्रति छटपटाहट उन्हें शरदोत्सव के मंच तक खींच लायी व शास्त्रीय संगीत के महाकुंभ में स्टेज संभालने का अवसर मिला गया और रामपुर घराने के नवरत्नों के संपर्क में आ गए वहीं से संगीत के गुर व शास्त्रीय संगीत गायन/वादन इत्यादि की शुरुआत हुई। साथ-साथ सखा जी का रंगमंच में दखल बढ़ता गया।
शांतिनिकेतन से चित्रकला, मूर्ति निर्माण में ज्ञान प्राप्त कर चुके सखा जी इस कला में भी अहम भूमिका निभाने लगे। साख जी एक जानेमन कम्युनिटी रहें, खेलों के प्रति रुचि उन्हें बॉक्सिंग की तरपफ भी ले गई और वह एक कुशल बॉक्सर बनकर उभरे। एक मूर्तिकार, चित्रकला में पारंगत शास्त्रीय संगीत के प्रतिभावान गायक, सितार वादक के रूप में अपने हुनर को सरोवर नगरी में स्थापित करते चले गये। विशम्बर नाथ साह एक कुशल शिकारी के साथ सीआरटी इंटर कॉलेज व सेंट जोसेफ कॉलेज में इंग्लिश के शिक्षक रहते हुए भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। एक कम्युनिस्ट विचारधारा के होने के साथ-साथ विशंभर नाथ सखा नयना देवी मंदिर के ट्रस्टी भी थे। वर्तमान समय तक नयना देवी शिल्प कार्य मे अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहे। छावनी परिषद नैनीताल के तीन बार के सभासद विशंभर नाथ सखा अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे जिनमें से दो भाइयों का निधन विगत वर्षों में हो गया था। विशंभर नाथ सखा अपने पीछे अपनी धर्मपत्नी सोना साह, अपनी पुत्री दीपाली साह, जवाई अनुज साह, नातिन भानवी आदि छोड़ गए हैं।
