पुलिस की ज़्यादतियां बर्दाश्त के बाहर हाई कोर्ट का आदेश बॉडी कैमरा लगाएं पुलिसकर्मी

कोर्ट ने जिग्नेश मेवाणी को जमानत देने के अपने आदेश में गुवाहाटी हाईकोर्ट से राज्य में हाल ही में पुलिस की ज्यादतियों के खिलाफ दायर एक याचिका पर विचार करने का अनुरोध किया। साथ ही कहा कि वह असम पुलिस को बॉडी कैमरा पहनने और अपने वाहनों में CCTV कैमरे लगाने का आदेश दे, ताकि किसी आरोपी को हिरासत में लिए जाने पर घटनाओं को कैद किया जा सके।
महिला ने FIR में कुछ और कहा, मजिस्ट्रेट के सामने अलग कहानी बताई
जज अपरेश चक्रवर्ती ने आदेश में कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज महिला के बयान के मद्देनजर अगर तत्काल मामले को सच मान लिया जाए, जो सच नहीं है, तो हमें देश के आपराधिक न्यायशास्त्र को फिर से लिखना होगा। कोर्ट ने कहा कि महिला ने FIR में कुछ और कहा है और मजिस्ट्रेट के सामने एक अलग कहानी बताई है। महिला की गवाही को देखते हुए लग रहा है कि जिग्नेश मेवाणी को हिरासत में रखने के उद्देश्य से तत्काल मामला बनाया गया है।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस कर्मियों की ओर से ऐसे आरोपियों को गोली मारकर हत्या करने या उन्हें घायल करने के मामले राज्य में नियमित बन गए हैं। हाई कोर्ट असम पुलिस को कुछ उपाय करके खुद को सुधारने का निर्देश देने पर विचार कर सकता है।
