Haldwani—लंबे समय तक चले संबंधों के बाद दुष्कर्म का आरोप, अदालत ने आरोपी को किया दोषमुक्त

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हल्द्वानी। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार की अदालत ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में शिवम मौर्य को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने आईपीसी की धारा 376 और 506 के आरोपों से उसे बरी किया। बचाव पक्ष ने सुनवाई के दौरान युवती के परिजनों और आरोपी के परिवार के बीच हुए विवाद से जुड़े क्रॉस केस के दस्तावेज और अन्य परिस्थितियों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया।

अभियोजन के अनुसार आरोपी और युवती की वर्ष 2016-17 से जान-पहचान थी। आरोप था कि वर्ष 2021 में आरोपी ने खाना बनाने के बहाने युवती को अपने घर बुलाया और शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए। इसके बाद वर्ष 2023 में होटल में बुलाकर भी शादी का वादा करते हुए संबंध बनाने का आरोप लगाया गया था। अभियोजन की ओर से यह भी कहा गया कि दोनों परिवारों के बीच शादी को लेकर बातचीत हुई थी और युवती के परिवार की ओर से टीके के रूप में 2100 रुपये और मिठाई भेजी गई थी।

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बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजन सिंह मेहरा ने अदालत में मामले की परिस्थितियों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 4 अप्रैल को युवती के चाचा और फूफा आरोपी के घर में घुस गए थे और उसकी मां के साथ कथित तौर पर अभद्रता व मारपीट की थी। इस संबंध में थाना काठगोदाम में तहरीर दी गई थी। बचाव पक्ष का कहना था कि इसके अगले दिन युवती की ओर से आरोपी के खिलाफ तहरीर देकर उसे जेल भिजवाया गया।

अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि युवती ने मेडिकल परीक्षण कराने से इनकार किया था। साथ ही आरोपी के जेल में रहने के दौरान युवती और उसकी मां के उससे दो बार मिलने तथा युवती की ओर से उसकी जमानत के लिए शपथ-पत्र दिए जाने की बात अदालत के समक्ष रखी गई।

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बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध को महज बाद में शादी से इंकार किए जाने के आधार पर हर मामले में दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही युवती के चाचा और फूफा के खिलाफ चल रहे मामले से संबंधित दस्तावेज भी अदालत में बचाव साक्ष्य के रूप में पेश किए गए।

अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद शिवम मौर्य को धारा 376 और 506 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।

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