हल्द्वानी: रेलवे बनाम बनभूलपुरा अतिक्रमण मामला सी एम धामी ने वकीलों को दिए मज़बूत पैरवी के निर्देश जनवरी में सुनवाई की संभावना

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आज़ाद कलम:- हल्द्वानी अतिक्रमण प्रकरण जल्द से जल्द सर्वोच्च न्यायालय में सुना जाए, इसको लेकर सीएम धामी ने स्टैंडिग काउंसिल अधिवक्ताओं से चर्चा की है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया है। इस मामले को पिछली तारीख में जस्टिस सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की बेंच ने इसलिए सुनने से इंकार कर दिया था क्योंकि न्यायमूर्ति धूलिया पूर्व में नैनीताल हाई कोर्ट में इस केस में एक पक्ष की तरफ से वकालत कर चुके थे। धूलिया के द्वारा इस केस की सुनवाई से अपने को 3 कर लिए जाने के बाद इसे नई बेंच को अभी सौंपा जाना है। हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास बनभूलपुरा गफूर बस्ती में 29 एकड़ भूमि को लेकर विवाद है, रेलवे, राजस्व و वन, नगर निगम इसे अपनी जमीन बताता है जबकि कब्जेदार इसे अपनी खरीदी हुई जमीन बताते रहे हैं। यह मामला रेलवे की अदालतों से लेकर हाईकोर्ट तक सुना जा चुका है। पिछले साल 20 दिसंबर को नैनीताल हाई कोर्ट ने इसे अतिक्रमण मानते हुए इसे खाली करने के आदेश दिए थे, जिस पर प्रशासन की कारवाई से पहले ही कब्जेदारों ने इस पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले लिया और ये स्टे सुनवाई पूरी होने तक जारी रहेगा।

इस मामले के सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी नहीं होने की वजह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सरकार के सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी करने वाले वकीलों से नाराजगी भी जाहिर की थी।

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सीएम धामी ने इस प्रकरण पर कुछ दिनों पहले रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से भी बात की थी और इस पर रेलवे से प्रभावी पैरवी की अपेक्षा जताई थी, जिसपर रेल मंत्री ने सहमति भी जताई।

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अधिवक्ता पैनल ने इस बारे में अपनी कार्य योजना भी तैयार कर ली है और वे उत्तराखंड के अधिवक्ताओं के साथ संपर्क में हैं। जस्टिस धूलिया द्वारा इस केस की सुनवाई से अपने को अलग कर लिए जाने के बाद यह केस अभी किसी नई बेंच को आबंटित नहीं किया गया है।

सीएम धामी ने उत्तराखंड के वकील अभिषेक अत्रेय को निर्देशित किया है कि वे इस मामले की सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी करें। माना जा रहा है कि क्रिसमस और ईसाई नव वर्ष के अवकाश के बाद उच्चतम न्यायालय में यह केस एक बार फिर से सूचीबद्ध हे किसी नई बेंच में सुना जा सकता है।

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