20.5 करोड़ का प्लॉट, कोर्ट की फटकार और ‘गद्दारी’ के आरोप… यूसुफ पठान पर क्यों मचा है बवाल?

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पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद यूसुफ पठान एक बार फिर वडोदरा की एक विवादित जमीन को लेकर चर्चा में हैं। गुजरात के वडोदरा नगर निगम (VMC) ने करीब 978 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले उस प्लॉट की नई कीमत लगभग 20.5 करोड़ रुपये तय कर दी है, जिसे 14 वर्ष पहले पठान को लीज पर देने का प्रस्ताव किया गया था। अब निगम इस जमीन को खुली नीलामी के जरिए बेचने की तैयारी में है।

2012 में शुरू हुआ था मामला

विवाद की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी, जब यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम से 99 साल की लीज पर एक प्लॉट आवंटित करने का अनुरोध किया था। नगर निगम ने उस समय प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी थी और जमीन का मूल्य लगभग 57 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया गया था। हालांकि, नगर निगम का फैसला अंतिम नहीं था और इसके लिए राज्य सरकार की स्वीकृति आवश्यक थी।

राज्य सरकार ने क्यों रोका आवंटन?

वर्ष 2014 में गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। विभाग का तर्क था कि नगर निगम की जमीन किसी व्यक्ति को सीधे आवंटित नहीं की जा सकती। इसके लिए खुली बोली या टेंडर प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है, ताकि सभी पात्र लोग समान अवसर प्राप्त कर सकें। सरकार की मंजूरी न मिलने के कारण यह आवंटन कभी प्रभावी नहीं हो सका और जमीन कानूनी रूप से यूसुफ पठान के नाम नहीं हुई।

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सांसद बनने के बाद फिर उठा मामला

जून 2024 में पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से टीएमसी सांसद चुने जाने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया। वडोदरा नगर निगम ने पठान को नोटिस जारी करते हुए आरोप लगाया कि वह निगम की जमीन पर बिना वैध अधिकार के कब्जा बनाए हुए हैं। इसके बाद यूसुफ पठान ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और जमीन पर अपने दावे को मान्यता देने की मांग की।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

अगस्त 2025 में गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 2014 के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सरकार ने नियमों के अनुरूप ही जमीन आवंटन से इनकार किया था। हाल ही में 15 जून को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने पठान को चार सप्ताह का समय दिया और कहा कि यदि वे 1999 की उस नीति के तहत राहत चाहते हैं, जिसमें कुछ मामलों में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को जमीन देने का प्रावधान है, तो वे संबंधित आवेदन कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाया। कोर्ट ने पूछा कि जब 2014 में जमीन आवंटन का प्रस्ताव रद्द हो चुका था और निगम को कोई भुगतान भी नहीं किया गया था, तो फिर इतने वर्षों तक जमीन पर कब्जा कैसे बना रहा? अदालत ने संकेत दिया कि यदि नगर निगम की भूमि का उपयोग किया गया है तो उसके बदले बाजार मूल्य के आधार पर राशि वसूली जा सकती है।

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नगर निगम का पक्ष

वडोदरा नगर निगम का कहना है कि खिलाड़ियों को जमीन देने संबंधी नीति इस मामले में लागू नहीं होती, क्योंकि संबंधित भूमि राज्य सरकार की नहीं बल्कि नगर निगम की संपत्ति है। इसी बीच निगम ने प्लॉट का नया मूल्यांकन करते हुए इसकी कीमत करीब 20.5 करोड़ रुपये तय की है। यह राशि उस मूल्य से लगभग तीन गुना अधिक है, जिस पर वर्ष 2012 में आवंटन का प्रस्ताव था। जुलाई में इस प्रस्ताव को निगम के जनरल बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद जमीन की खुली नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

सियासी विवाद ने बढ़ाई गर्मी

जमीन विवाद के बीच यूसुफ पठान का नाम हाल ही में टीएमसी के भीतर उभरे राजनीतिक विवाद से भी जुड़ गया है। बताया जा रहा है कि वे उन सांसदों के समूह में शामिल हैं जिन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अलग रुख अपनाया है। इस घटनाक्रम के बाद टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने उन्हें “गद्दार” और “रीढ़विहीन” बताते हुए आरोप लगाया कि वडोदरा स्थित विवादित प्लॉट और संभावित कार्रवाई के दबाव के कारण उन्होंने राजनीतिक रुख बदला है। हालांकि, इन आरोपों पर यूसुफ पठान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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