haldwani…खुद डॉक्टर मत बना करिये, जोखिमभरी हो सकती है स्वचिकित्सा, एसटीएच के डॉक्टरों ने बताए दुष्परिणाम

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हल्द्वानी। सोमवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज के पफार्माकोलॉजी विभाग द्वारा मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित लेक्चर थियेटर में स्वचिकित्सा के दुष्प्रभाव व दुष्परिणाम विषय पर पांच दिवसीय जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। फार्माकोलॉजी विभाग की डा. रीना भारद्वाज ने कहा कि स्वचिकित्सा का मतलब किसी भी दवाई को बिना डाक्टर परामर्श के लेना है। हमें लोगों को जागरूक करना है कि स्वचिकित्सा जोखिमभरा कदम हो सकता है जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। फार्माकोलॉजी विभाग के डा. कुणाल शर्मा, डा. शुजाउद्दीन व डा. नीरज राजदान ने स्वचिकित्सा से होने वाले दुष्प्रभाव व दुष्परिणाम के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

पांच दिवसीय कार्यक्रम के तहत फार्माकोलॉजी विभाग के चिकित्सकों द्वारा शहरी व ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। कार्यक्रम में एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं ने पावर प्रेजेटेंशन व नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्वचिकित्सा के दुष्प्रभाव व दुष्परिणाम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता फैलाने वाले छात्रों को प्रशस्ति पत्र द्रेकर सम्मानित किया। डा. अरूण जोशी प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम के आयोजनों से लोगों को जागरूकता का संदेश मिलता है।

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उन्होने कहा कि स्वयं द्वारा दवाईयां लेने से हमारे शरीर में कई दिक्कतें हो सकती है। डा. जोशी ने लोगों को चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद ही दवाई लेने की सलाह दी। कार्यक्रम में प्राचार्य डा. अरूण जोशी, डा. उमेश, डा. रीना भारद्वाज, डा. हरीशंकर पांडे, डा. पंकज वर्मा, डा. नीरज राजदान, शुजाउद्दीन, डा. अजय कुमार, अनिता अधिकारी प्राचार्या नर्सिंग कॉलेज समेत रेजीडेण्ट चिकित्सक, एमबीबीएस व नर्सिंग के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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