हल्द्वानी में रेलवे और राजस्व भूमि के मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई, सरकार को दस दिन में जांच करने के निर्देश

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नैनीताल उत्तराखंड हाईकोर्ट में सोमवार को हल्द्वानी में भू माफि याओं के द्वारा रेलवे तथा वन विभाग व राजस्व की भूमि को सौ और पाँच सौ रुपये के स्टाम्प पर बेचे जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा के खंडपीठ ने राज्य सरकार तथा वन विभाग व रेलवे विभाग को निर्देश दिए कि वह 10 दिन के भीतर मामले की जांच करके अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करें। मामले की अगली सुनवाई हेतु खंडपीठ ने 22 दिसम्बर (शुक्रवार) की तिथि नियत की है। बता दें कि पूर्व में कोर्ट ने याचिकाकर्ता से इस सम्बन्ध में भूमि बेचे जाने के सबूत पेश करने को कहा था जिसे सोमवार को उनके द्वारा पेश किया गया।

साथ में याचिकाकर्ता के द्वारा यह भी कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि उनको जानमाल का खतरा हो सकता है लिहाजा उन्हें सुरक्षा दिलाई जाए, जिसपर कोर्ट ने मौखिक तौर पर सम्बंधित एसएचओ को निर्देश दिए हैं कि उन्हें किसी तरह का खतरा उप्तन्न न हो क्योंकि वे यह कार्य जनहित के लिए कर रहे हैं। मामले के मुताबिक हल्द्वानी निवासी हितेश पांडे ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हल्द्वानी के गफूरबस्ती में रेलवे की भूमि तथा गौलापार गौजाजाली स्थित वन विभाग व राजस्व की भूमि को भू माफियाओं के द्वारा सौ और पाँच सौ के स्टाम्प पर बेच दिया गया है। कहा है कि जिन लोगो को यह भूमि बेची गयी वे लोग उत्तराखंड के स्थायी निवासी नहीं है। ये लोग रोजगार के लिए यहां आए थे।

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कुछ ही समय बाद सीएससी सेंटर में इनके वोटर आईडी तक बन गए जब इसकी शिकायत प्रशासन तथा मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई तो याचिकाकर्ता को जान माल की धमकी तक भू माफियाओं के द्वारा दी गयी। जनहित याचिका में कहा गया कि यह लोग उत्तराखंड के स्थायी निवासी नहीं हैं। राज्य सरकार के द्वारा वोट बैंक के चक्कर मे इनके लिए बिजली तथा पानी के साथ ही स्कूल व हॉस्पिटल के लिए करोड़ों रूपये खर्च किया जा रहा है जिसका भार स्थायी लोगो पर पड़ रहा है,कहा है कि जिसकी वजह से स्थायी लोगो को सरकार की योजनाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा सरकारी धन का दुरपयोग किया जा रहा है। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि इस मामले की जाँच उच्च स्तरीय कमेटी से की जाए। इनके सभी दस्तावेजों की भी गहनता से जांच की जाए।

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