जानिए “राजद्रोह”और “देशद्रोह” में क्या अंतर है

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आज़ाद क़लम:- भारतीय दंड संहिता की धारा 124A में राजद्रोह या देशद्रोह का उल्लेख है. ये धारा कहती है, ‘अगर कोई व्यक्ति बोलकर या लिखकर या इशारों से या फिर चिह्नों के जरिए या किसी और तरीके से घृणा या अवमानना या उत्तेजित करने की कोशिश करता है या असंतोष को भड़काने का प्रयास करता है तो वो राजद्रोह का आरोपी है.’

ये एक गैर-जमानती अपराध है और इसमें दोषी पाए जाने पर तीन साल की कैद से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है. साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

– अक्सर ‘राजद्रोह’ और ‘देशद्रोह’ को एक ही मान लिया जाता है, लेकिन जब सरकार की मानहानि या अवमानना होती है तो उसे ‘राजद्रोह’ कहा जाता है और जब देश की मानहानि या अवमानना होती है तो उसे ‘देशद्रोह’ कहा जाता है. अंग्रेजी में इसे Sedition कहते हैं. दोनों ही मामलों में धारा 124A का इस्तेमाल होता है.

सबसे पहले ये कानून इंग्लैंड में आया था. 17वीं सदी में जब इंग्लैंड में वहां की सरकार और साम्राज्य के खिलाफ आवाजें उठने लगीं तो अपनी सत्ता बचाने के लिए राजद्रोह का कानून लाया गया. यहीं से ये कानून भारत में आया.

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– भारत में ब्रिटेन के कब्जा करने के बाद थॉमस मैकॉले को इंडियन पीनल कोड यानी आईपीसी का ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी मिली. 1860 में आईपीसी को लागू किया गया. हालांकि, उस वक्त इसमें देशद्रोह का कानून नहीं था.

– बाद में जब अंग्रेजों को लगा कि भारतीय क्रांतिकारियों को शांत करने का कोई और उपाय नहीं बचा है तो उन्होंने आईपीसी में संशोधन किया और इसमें धारा 124A को जोड़ा. आईपीसी में ये धारा 1870 में जोड़ी गई.

– इस धारा का इस्तेमाल स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने और सेनानियों को गिरफ्तार करने के लिए किया जाने लगा. इसका इस्तेमाल महात्मा गांधी, भगत सिंह और बाल गंगाधर तिलक जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ हुआ.

– महात्मा गांधी को जब इस धारा के तहत गिरफ्तार किया गया, तब उन्होंने कहा, ‘स्वतंत्रता आंदोलन को कमजोर करने के लिए जो कानून बनाए हैं, उनमें ये सबसे हास्यास्पद और डरावना है. अगर किसी को सरकार की किसी बात से परेशानी है तो उसके पास इसे व्यक्त करने की आजादी होनी चाहिए. उसे ये आजादी तब तक होनी चाहिए, जब तक वो अपनी किसी बात से नफरत या हिंसा नहीं भड़काता.’

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इंदिरा गांधी की सरकार में हुआ बड़ा बदलाव

– 1947 में आजादी मिलने के बाद कई नेताओं ने देशद्रोह के कानून को हटाने की बात कही. लेकिन जब भारत का अपना संविधान लागू हुआ तो उसमें भी धारा 124A को जोड़ा गया.

– 1951 में जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने अनुच्छेद 19(1)(A) के तहत बोलने की आजादी को सीमित करने के लिए संविधान संशोधन लाया, जिसमें अधिकार दिया गया कि बोलने की आजादी पर तर्कपूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

– 1974 में इंदिरा गांधी सरकार में इस कानून से जुड़ा बड़ा बदलाव हुआ. इंदिरा गांधी की सरकार में देशद्रोह को ‘संज्ञेय अपराध’ बनाया गया. यानी, इस कानून के तहत पुलिस को किसी को भी बिना वारंट के पकड़ने का अधिकार दे दिया गया.

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