कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव..पायलट को पंजाब, सुरजेवाला को गुजरात का प्रभार

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2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने अपने संगठन को चुनावी मोड में लाते हुए बड़ा फेरबदल किया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों में संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक जमीन तैयार करने की कवायद के बीच पार्टी ने कई अहम नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस फेरबदल में सबसे ज्यादा नजर सचिन पायलट और रणदीप सुरजेवाला की नई जिम्मेदारियों पर है।

कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट को भूपेश बघेल की जगह पंजाब का नया प्रभारी बनाया गया है। वहीं बघेल को अब असम का प्रभारी महासचिव बनाया गया है। पंजाब में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान के बीच पायलट के सामने खेमों में बटी पार्टी को एकजुट करने की बड़ी चुनौती होगी।

सुरजेवाला को गुजरात की कमान

कांग्रेस ने महासचिव रणदीप सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी बनाया है। वह कर्नाटक के प्रभारी की जिम्मेदारी भी पहले की तरह संभालते रहेंगे।

गुजरात का प्रभार संभाल रहे मुकुल वासनिक महासचिव बने रहेंगे, लेकिन गुजरात की जिम्मेदारी अब सुरजेवाला को दी गई है। पार्टी के इस फैसले को गुजरात में संगठन को सक्रिय करने और आगामी राजनीतिक मुकाबले के लिए रणनीति मजबूत करने से जोड़कर देखा जा रहा है।

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छत्तीसगढ़ में सुखदेव भगत, महाराष्ट्र और आंध्र में भी बदलाव

नई नियुक्तियों के तहत झारखंड से सांसद और आदिवासी नेता सुखदेव भगत को सचिन पायलट की जगह छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है।

वहीं श्रीवेला प्रसाद को महाराष्ट्र और पीवी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है। पीवी मोहन इससे पहले केरल में पार्टी के सह-प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हाल ही में उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाया गया था और अब संगठन में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

श्रीवेला प्रसाद दलित समाज से आते हैं और इससे पहले झारखंड के सह-प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। नई नियुक्तियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक संतुलन पर भी कांग्रेस का फोकस नजर आता है।

जितेंद्र सिंह की महासचिव पद से छुट्टी

संगठनात्मक फेरबदल में असम के पूर्व प्रभारी जितेंद्र सिंह को महासचिव पद से हटा दिया गया है। उन्होंने साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद इस्तीफा दे दिया था।

वहीं आंध्र प्रदेश के प्रभारी रहे मणिकम टैगोर के तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने और महाराष्ट्र के प्रभारी रहे रमेश चेन्नीथला के केरल सरकार में मंत्री बनने के बाद संगठन में इन पदों पर नई नियुक्तियों का इंतजार किया जा रहा था।

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2027 की जंग से पहले संगठन को धार देने की कोशिश

कांग्रेस का यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब कई राज्यों में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज होनी है। पार्टी के सामने सिर्फ चुनावी मैदान में भाजपा और अन्य दलों से मुकाबला करने की चुनौती नहीं है, बल्कि कई राज्यों में संगठन के भीतर गुटबाजी, नेतृत्व का तालमेल और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना भी बड़ी चुनौती है।

नई नियुक्तियों में सामाजिक न्याय, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक संतुलन की छाप दिखाई देती है। साथ ही पार्टी संगठन में राहुल गांधी की सामाजिक न्याय की राजनीतिक लाइन और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की संगठनात्मक रणनीति की झलक भी नजर आती है।

लेकिन इस पूरी कवायद की असली परीक्षा चुनावी मैदान में होगी। खासकर पंजाब में सचिन पायलट के सामने कांग्रेस को एकजुट करने, गुटबाजी कम करने और कार्यकर्ताओं में नया भरोसा पैदा करने की चुनौती सबसे बड़ी होगी।

अब देखना होगा कि कांग्रेस के ये नए ‘सेनापति’ 2027 की चुनावी जंग से पहले पार्टी की कमजोर कड़ियों को कितना मजबूत कर पाते हैं।

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