15 दस्तावेज, 1951 NRC से लेकर PAN-Voter ID तक…फिर भी नहीं साबित हुई भारतीय नागरिकता! गौहाटी हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, जानिए क्यों

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असम में नागरिकता से जुड़े एक अहम मामले में गौहाटी हाईकोर्ट ने एक दिहाड़ी मजदूर की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 15 दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें 1951 की NRC, 1966 से 2015 तक की विभिन्न वोटर लिस्ट, 1973 की जमीन का दस्तावेज, स्कूल प्रमाणपत्र, PAN कार्ड और वोटर आईडी (EPIC) शामिल थे। इसके बावजूद अदालत ने माना कि वह कानूनी रूप से अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सका और विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunal) के फैसले को बरकरार रखा।

हाईकोर्ट ने कहा कि विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 9 के तहत नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होती है। केवल दस्तावेज पेश करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका कानूनी रूप से स्वीकार्य होना और उनसे पूर्वजों से स्पष्ट संबंध साबित होना भी जरूरी है। अदालत ने पाया कि कई दस्तावेज प्रमाणित नहीं थे, कुछ कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं थे और कई रिकॉर्ड में गंभीर विरोधाभास मौजूद थे।

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याचिकाकर्ता का कहना था कि नदी कटाव के कारण उसका परिवार कई गांवों में बसता रहा, इसलिए अलग-अलग जगहों पर रिकॉर्ड बने। उसने अपने पिता की मौखिक गवाही भी पेश की, लेकिन अदालत ने कहा कि नागरिकता जैसे मामलों में केवल मौखिक गवाही पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

अदालत ने 1951 की NRC की प्रति इसलिए खारिज कर दी क्योंकि वह कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड था और भारतीय साक्ष्य कानून के अनुसार आवश्यक प्रमाणपत्र के बिना पेश किया गया था। स्कूल प्रमाणपत्र इसलिए स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि न तो प्रधानाचार्य गवाह बने और न ही प्रवेश रजिस्टर पेश किया गया। वहीं 1973 की जमीन का दस्तावेज भी परिवार के उत्तराधिकार से नहीं जुड़ पाया।

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फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि PAN कार्ड और वोटर आईडी भारतीय नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं हैं। अदालत ने वोटर लिस्ट में उम्र और गांव से जुड़े कई विरोधाभास भी पाए, जिससे याचिकाकर्ता अपने पूर्वजों से दस्तावेजी संबंध साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने विदेशी न्यायाधिकरण के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

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