क्या इतिहास सच में दोहराता है खुद को ? 1966 से 2026 तक कई बार हुई पत्थरबाज़ी… लेकिन हर बार रहस्य अनसुलझा…अजीब घटना नैनीताल की

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उत्तराखण्ड के नैनीताल में घरों की छतों पर पत्थर मारने की अधिकतर घटनाओं का खुलासा ही नहीं हो सका। पत्थरबाज इंसान था या श्हवाश्, ये तक साफ नहीं हुआ है ? हालंकि इक्का दुक्का घटनाओं में पत्थरबाज खुंदक के चलते घटनाओं को अंजाम देते थे, जिन्हें पकड़कर शान्त कर दिया गया था।

नैनीताल एक ब्रिटिशकालीन सभ्यता का शहर है। यहां के पुराने लोग अक्सर अंग्रेजों की भटकती आत्माओं की कहानियां सुनाया करते थे। ऐसे में, आजादी के बाद बदलते नैनीताल के लोगों में भी श्आत्माश् और श्हवाओंश् के प्रभाव का असर देखने को मिलता रहा। आज भी देवभूमि के इस महत्वपूर्ण शहर में टोना टोटका, आत्मा, हवा, साया, देवी देवता जैसे अंधविश्वास को एक हद तक माना जाता है।

तल्लीताल के जिला पंचायत और जीवाजी लॉज कंपाउंड में पिछले 11 दिनों से अज्ञात द्वारा पत्थरबाजी की घटना ने लोगों की नीद उड़ा रखी है। रात 8 से 11 बजे तक हुई इस घटना में पत्थरबाज का कोई सुराग नहीं मिला। ऐसी कई घटनाएं शहर में पहले भी हो चुकी है जिनमें पत्थरबाज का अता पता नहीं चल सका था।

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सात नंबर निवासी हरीश ने बताया कि वर्ष 2006 में अल्मा लॉज कंपाउंड में पत्थरबाजी हुई थी, जिसका कुछ पता नहीं चल सका था। मेलविल हॉल निवासी अरुन साह ने बताया कि होटल शालीमार के समीप मेलविल हॉल में 1966 में ऐसी घटना ही हुई थी, लेकिन इसमें किसी को पकड़ा नहीं जा सका था और ये घटना खुद ही रुक गई थी।

कैलाश ने बताया कि वर्ष 1989 में रैम्जे अस्पताल के आसपास पत्थरबाजी की घटना हुई थी, जिसमें कोई पकड़ा नहीं गया और मामला कुछ दिनों बाद खुद ब खुद शांत हो गया। इसके अलावा आहार विहार/नैनीताल बैंक भवन में भी पत्थरबाजी होती थी, जिसका शक राजपुरा के उपद्रवी पर गया था, लेकिन वो भी समय के साथ बन्द हो गई और इसमें भी अन्य घटनाओं की तरह कोई पकड़ा नहीं गया था।

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इससे पृथक, चार्टनलॉज निवासी भरत ने बताया कि चार्टनलॉज में दो वर्ष पूर्व किसी अधेड़ ने खुंदक के चलते छतों और गाड़ियों में पत्थर मार शीशे तोड़े थे। तब क्षेत्रीय लोगों ने सी.सी.टी.वी.लगा और गश्त कर उसे पकड़कर धुनाई की थी। तब से वो क्षेत्र शांत है। बिड़ला रोड निवासी शोभा ने बताया की वर्ष 1975 में लेक व्यू एनेक्सी में भी खुंदक के चलते कुछ लोगों ने पत्थरबाजी की थी, वार्ता के बाद मामला शांत हो गया था।

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