MBPG Haldwani में भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली पर त्रिदिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन

हल्द्वानी। एम.बी.जी. पी.जी. कॉलेज के शिक्षा विभाग द्वारा संस्कृत एवं योग विभाग के सहयोग से स्नातक षष्ठ सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए “भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली” विषय पर आयोजित त्रिदिवसीय कार्यशाला का प्रथम दिवस अत्यंत ज्ञानवर्धक, संगठित एवं प्रेरणाप्रद रहा। इस कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की दार्शनिक गहनता, समकालीन प्रासंगिकता तथा जीवनोपयोगी आयामों से व्यवस्थित रूप में अवगत कराना है।
प्रथम अकादमिक सत्र में संस्कृत विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रो. कमला पंत ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की केन्द्रीय अवधारणा का विशद एवं शास्त्रीय विवेचन प्रस्तुत किया। उन्होंने वेद, उपनिषद, स्मृतियों तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों के उदाहरणों के माध्यम से यह प्रतिपादित किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं, अपितु वर्तमान जीवन के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक, व्यावहारिक एवं मार्गदर्शी है। उनके व्याख्यान में दार्शनिक गहराई के साथ जीवन-व्यवहार से संबद्ध व्याख्यात्मक दृष्टि का समुचित समन्वय परिलक्षित हुआ, जिसने विद्यार्थियों को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया।
द्वितीय सत्र में योग विभाग के डॉ. हरीश पाठक ने आयुर्वेद एवं एक्यूप्रेशर के दैनिक जीवन में उपयोग की उपयोगिता पर वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियाँ न केवल शारीरिक संतुलन स्थापित करती हैं, बल्कि मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ बनाती हैं। सरल तकनीकों, जीवनशैली-आधारित उदाहरणों एवं व्यवहारिक सुझावों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को स्वस्थ एवं रोगमुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के समन्वयक, शिक्षा विभाग के दिनेश कुमार ने दिवस की गतिविधियों का समापन करते हुए विद्यार्थियों को स्वाध्याय, चिंतनशीलता तथा आजीवन अधिगम की ओर उन्मुख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली का मूल उद्देश्य व्यक्ति को आत्मपरक चिंतन, निरंतर आत्मनवीकरण तथा समग्र उत्कर्ष की दिशा में अग्रसर करना है, जिससे व्यक्ति स्वयं को विकसित करते हुए समाज के लिए भी उपयोगी बन सके।
इस अवसर पर डॉ. सोनी टम्टा, ममता अधिकारी एवं गौरवेन्द्र देव आर्य, शोधार्थी सुश्री कंचन भट्ट ने कार्यशाला के सफल प्रबंधन एवं समन्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता एवं सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम की प्रभावशीलता को और अधिक सुदृढ़ किया।




