भीषण गर्मी में बच्चों को हीट स्ट्रोक से कैसे बचाएं, बता रही हैं हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की डा. गुंजन नगरकोटी

हल्द्वानी। प्रदेश सहित कुमाऊँ क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण बच्चों में हीट स्ट्रोक (लू लगना) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी के बाल रोग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डा. गुंजन नगरकोटी ने यह जानकारी देते बताया कि हीट स्ट्रोक शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ जाने के कारण उत्पन्न होने वाली एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है।
समय पर उचित उपचार न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि बच्चों में हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, अत्यधिक पसीना आना अथवा पसीना बंद हो जाना, शरीर में कमजोरी, चक्कर आना, उल्टी, सिरदर्द, बेचौनी, बेहोशी तथा सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं।
छोटे बच्चों में चिड़चिड़ापन, सुस्ती एवं अत्यधिक थकान भी इसके प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं। डा. गुंजन नगरकोटी ने अभिभावकों को सलाह देते हुए कहा कि बच्चों को तेज धूप में बाहर खेलने या अनावश्यक रूप से बाहर घूमने से बचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त नींबू पानी, ओआरएस, छाछ, नारियल पानी एवं अन्य तरल पदार्थ नियमित रूप से देते रहना चाहिए, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो और शरीर का तापमान संतुलित बना रहे। डा. गुंजन ने यह भी सलाह दी कि बच्चों को हल्के रंग के, ढीले एवं सूती कपड़े पहनाने चाहिए, जिससे शरीर को ठंडक मिल सके और पसीना आसानी से सूखता रहे।
बाहर जाते समय बच्चों को टोपी, छाता अथवा कपड़े से सिर ढककर रखना भी लाभदायक होता है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों में हीट स्ट्रोक के किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है, क्योंकि समय पर उपचार न मिलने पर हीट स्ट्रोक गंभीर रूप धारण कर सकता है। चिकित्सा अधीक्षक डा. अरुण जोशी ने भी अभिभावकों से अपील की है कि वे गर्मी के मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें तथा आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।




