गुजरात के जालसाज बनभूलपुरा के लोगों को लाखों का चूना लगा गए…(हल्द्वानी)

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हल्द्वानी। गुजरात के जालसाज बनभूलपुरा के दर्जनों लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाकर फरार हो गए। जालसाजों ने माइक्रो फाइनेंस कंपनी के नाम पर इलाके में जाल बिछाया और लोन दिलाने के नाम पर लोगों से चार-चार हजार रुपये जमा करा लिए। मनी कलेक्शन का यह खेल एक तय तारीख तक चलता रहा और फिर जालसाज अपने दफ्तर में ताला लगाकर फरार हो गए। सोमवार रात नाराज लोगों ने कंपनी के दफ्तर के बाहर जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया।

जानकारी के अनुसार बनभूलपुरा लाइन नंबर-8 निवासी एक व्यक्ति का गौजाजाली क्षेत्र में मकान है। करीब एक माह पहले उसने अपना मकान किराये पर दिया था। वहां आईएनसी फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से बोर्ड लगाकर एक कथित माइक्रो फाइनेंस कंपनी खोली गई। कार्यालय में कुछ मेज-कुर्सियां लगाकर लोगों को हाथों-हाथ लोन दिलाने का झांसा दिया गया। आधार कार्ड और पैन कार्ड के आधार पर सिविल चेक कर लोन स्वीकृत कराने का दावा किया गया तथा फाइल चार्ज के नाम पर प्रत्येक व्यक्ति से चार-चार हजार रुपये जमा कराए गए।

सभी आवेदकों को एक ही तारीख देकर कहा गया कि उसी दिन उनके खाते में लोन की राशि आ जाएगी या फोन किया जाएगा। लेकिन न तो किसी के खाते में पैसे आए और न ही कोई फोन आया। तय तारीख बीतने के बाद सोमवार रात दर्जनों लोग कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला और अंदर केवल कुछ मेज-कुर्सियां थीं।

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इंद्रानगर, पप्पू का बगीचा निवासी वकील अहमद पुत्र वजीर अहमद ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि इस पूरे गिरोह में एक महिला और चार पुरुष शामिल थे, जो खुद को गुजरात का निवासी बताते थे। एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि फिलहाल करीब 20 लोगों की शिकायत मिली है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। अभी तक ठगी गई कुल रकम और पीड़ितों की वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि पीड़ितों की संख्या 100 के करीब हो सकती है।

किराये पर मकान देने वाला भी जांच के घेरे में
पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस मकान में कथित माइक्रो फाइनेंस कंपनी संचालित हो रही थी, वह बनभूलपुरा लाइन नंबर-8 निवासी एक व्यक्ति का है। उसने करीब एक माह पहले अपना मकान इन लोगों को किराये पर दिया था। आरोपियों ने उसे पांच हजार रुपये किराया भी दिया था, लेकिन मकान मालिक ने किरायेदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया। अब पुलिस सत्यापन न कराने पर उसका चालान करने की तैयारी कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं वह इस पूरे षड्यंत्र में किसी रूप में शामिल तो नहीं था।

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लालच में एक ही परिवार के कई सदस्य बने शिकार
पीड़ितों के अनुसार जालसाज जरूरतमंद लोगों को उनकी सिविल हिस्ट्री के आधार पर 40 हजार, 50 हजार से लेकर 60 हजार रुपये तक का लोन दिलाने का दावा कर रहे थे। अधिक रकम की जरूरत वाले परिवारों ने एक साथ चार-चार सदस्यों के नाम से आवेदन कर दिए और प्रत्येक सदस्य ने चार-चार हजार रुपये जमा किए। सभी को चार जुलाई तक लोन मिलने का भरोसा दिया गया, लेकिन तय तारीख आते ही पूरा खेल सामने आ गया और लोगों को एहसास हुआ कि वे सुनियोजित ठगी का शिकार बन चुके हैं। रात को अपने रुपये वापस लेने पहुंचे अधिकांश लोग गरीब और जरूरतमंद परिवारों से थे।

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