18 साल की उम्र में दुनिया को चौंकाने वाले निशानेबाज़ जसपाल राणा का निधन, देहरादून के अस्पताल में ली आखिरी सांस

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निशानेबाज जसपाल राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। वह देहरादून के मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। यहां उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने उनके निधन की पुष्टि की।

जसपाल भारत के पिस्टल निशानेबाजों के लिए श्हाई-परफॉर्मेंस कोचश् के रूप में कार्यरत थे,। म्यूनिख में आईएसएसएफ विश्व कप से भारत लौटते समय वह असहज महसूस कर रहे थे। महज 18 साल की उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाकर दुनिया को चौंकाने वाले जसपाल राणा ने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में भारत का परचम हमेशा बुलंद रखा।

2006 दोहा एशियन गेम्स में उनके तीन स्वर्ण पदक और वर्ल्ड रिकॉर्ड को कोई नहीं भूल सकता। हाल ही में म्यूनिख में हुए आइएसएसएफ वर्ल्ड कप के दौरान उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उनकी स्टेंट सर्जरी भी हुई थी। वे रिकवर हो रहे थे, लेकिन गुरुवार रात अचानक आए इस दुखद मोड़ ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया।

खेल के साथ-साथ उन्होंने सियासत में भी कदम रखा था। उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर टिहरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। लेकिन हार गए थे। 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान वे कांग्रेस के स्टार प्रचारक बने।

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पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जसपाला राणा के निधन पर गहरा शोक जताया। मोदी ने एक्स पर लिखा, जसपाल राणा जी के निधन से गहरा दुख हुआ है। उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने निशानेबाजी में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का मान बढ़ाया। एक मेंटर के तौर पर भी उनका योगदान बहुत अहम रहा। उन्होंने पूरी लगन से युवा खिलाड़ियों को तराशा और उनका मार्गदर्शन किया। बेहतरीन प्रदर्शन, अनुशासन और खेल जगत की सेवा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा के कारण उन्हें बहुत सम्मान मिला। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और पूरे खेल जगत के साथ हैं। ओम शांति।

राणा ने भारत में निशानेबाजी को बढ़ाया आगे
राणा का निधन भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। राणा ने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही रूपों में तीन दशकों से ज्यादा समय तक अपना योगदान दिया। उन्होंने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीते और देश के सबसे सफल निशानेबाजों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई। राणा ने कई वर्षों तक शानदार ढंग से भारत का प्रतिनिधित्व किया और निशानेबाजी को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई, खासकर उस समय जब देश में यह खेल विकसित हो रहा था। शूटिंग रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

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द्रोणाचार्य पुरस्कार से थे सम्मानित
एनआरएआई ने उन्हें आधिकारिक तौर पर 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। राणा को कड़ी ट्रेनिंग रूटीन शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। एनआरएआई ने फरवरी 2025 में राणा को 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। खेल और शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनके बड़े योगदान के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया।

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